पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की घरेलू और व्यावसायिक रसोई गैस आपूर्ति पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने उपभोक्ताओं के बीच घबराहट बढ़ा दी है। यही कारण है कि रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी दोनों अचानक से बढ़ गई है। एक तरफ आम लोग घंटों लाइनों में खड़े हैं, तो दूसरी तरफ उद्योग-धंधे ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं. आइए सवाल-जवाब के जरिए इस संकट की राज्यवार जमीनी हकीकत और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का विश्लेषण करते हैं। सवाल: पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट ने भारत में एलपीजी सप्लाई चेन को किस तरह प्रभावित किया है? पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की रसोई और व्यापार पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 से 62 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण यह मार्ग लगभग बंद जैसी स्थिति में आ गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है, बीमा लागत बढ़ गई है और गैस की खेप समय पर नहीं पहुंच पा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की खबरों ने देश भर में गैस की कमी की आशंकाओं को जन्म दिया है। नतीजतन, आम जनता के बीच पैनिक बुकिंग शुरू हो गई है। लोग गैस खाली होते ही तुरंत नया सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं और डिलीवरी सिस्टम चरमरा गया है। भारत के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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