और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच बातचीत हुई, जिसमें जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। जानकारी मिली है कि पिछले चार-पांच दिनों से ईरान ने किसी भी भारतीय झंडे वाले व्यावसायिक टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस समय भारतीय झंडे वाले 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक हैं। वहीं, चार जहाज, इस अहम समुद्री मार्ग के पूर्वी हिस्से में तैनात हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हाल के दिनों में भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। लेकिन इसके आगे कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगा। ये भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है दुनिया के 20 फीसदी तेल की आवाजाही ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य आंशिक रूप से बंद होने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने भारतीय झंडे वाले दो जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है, तो जायसवाल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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