जहरीला धुआं भी बड़ी चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि केवल काली बारिश ही नहीं, बल्कि तेल डिपो में लगी आग से उठ रहा घना जहरीला धुआं भी बड़ी चिंता का विषय है। अगर हवा में धुएं की गंध महसूस हो रही है, तो इसका मतलब है कि प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लायक हो सकता है। घनी आबादी वाले इलाकों के ऊपर छाए जहरीले धुएं के बादल लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। संभावित स्वास्थ्य जोखिम अल्पकाल में इस जहरीले धुएं और काली बारिश के संपर्क में आने वाले लोगों को सिरदर्द, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और दिव्यांग लोग विशेष रूप से अधिक जोखिम में हैं। गर्भावस्था के दौरान ऐसे प्रदूषण के संपर्क में आने से बच्चों का जन्म के वक्त वजन कम होने का खतरा भी बढ़ सकता है। लंबे समय में हवा और बारिश में मौजूद जहरीले रसायनों के संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। बेहद महीन कण PM2.5 सांस के जरिए शरीर में जाकर रक्तप्रवाह तक पहुंच सकते हैं। इन कणों को कैंसर, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों (जैसे संज्ञानात्मक क्षति) और हृदय संबंधी समस्याओं से जोड़ा गया है। पर्यावरण पर भी असर जब यह प्रदूषित हवा बारिश के जरिए नदियों और अन्य जल स्रोतों में पहुंचती है तो इससे जलीय जीवन और पीने के पानी पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा काली बारिश इमारतों, सड़कों और अन्य सतहों पर भी जहरीले रसायन जमा कर देती है। बाद में तेज हवा चलने या अन्य गतिविधियों से ये कण फिर से हवा में फैल सकते हैं, जिससे प्रदूषण लंबे समय तक बना रह सकता है। युद्ध का दीर्घकालिक असर दुनिया भर में युद्ध …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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