जनरल चौहान ने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऊर्जा की जरूरत भी काफी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि डाटा केंद्रों को चलाने के लिए परमाणु ऊर्जा और एआई एक-दूसरे के पूरक साबित हो सकते हैं। इस सत्र का शीर्षक ‘द टेक ट्रायड’ था। इसमें परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालित (ऑटोमैटिक) हथियारों पर चर्चा की गई।सीडीएस ने कहा कि सैन्य क्षेत्र में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मौजूदा संघर्षों में भी इसका इस्तेमाल देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले सैन्य ताकत टैंक, विमान, जहाज और पनडुब्बियों जैसे साधनों पर आधारित होती थी। लेकिन आज इनके साथ-साथ डाटा, नेटवर्क और खुफिया जानकारी भी बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध में एआई और स्वचालित प्रणालियां बड़ी भूमिका निभाएंगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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