पेजेशकियन ने कहा कि ईरान कई बार यह कह चुका है कि पड़ोसी देशों के साथ भाईचारे और अच्छे रिश्ते होने चाहिए। हालांकि अगर ईरान पर हमला होता है तो जवाब देना उसकी मजबूरी बन जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि जवाबी कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि ईरान का किसी पड़ोसी देश से विवाद है या वह वहां के लोगों को नुकसान पहुंचाना चाहता है।अपने बयान में उन्होंने कहा कि बार-बार कहा गया है कि हम भाई हैं और हमें पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए। हालांकि, हमें हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा किसी (पड़ोसी) देश के साथ कोई विवाद है या हम उनके लोगों को नाराज करना चाहते हैं।इस बीच अमेरिकी की लगातार धमकियों के बीच पेजेशकियन ने करारा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान देश की एक इंच जमीन भी किसी को नहीं लेने देगा। यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका और इस्राइल लगातार अलग-अलग दावे कर रहे हैं।इससे पहले पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद रखना सिर्फ एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।मसूद पेजेशकियन का ये बयान ऐसे समय में आए हैं, जब कुछ रिपोर्टों में यह समझा जा रहा था कि ईरान ने खाड़ी देशों पर हमलों को रोकने का फैसला किया है, हालांकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत बताई जा रही थी। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान पर जब हमले होते हैं, तो वह जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
'एक इंच जमीन भी नहीं लेने देंगे': अमेरिका को ईरान की दो टूक; पड़ोसी देशों पर हमले रोकने वाले बयान पर दी सफाई
पेजेशकियन ने कहा कि ईरान कई बार यह कह चुका है कि पड़ोसी देशों के साथ भाईचारे और अच्छे रिश्ते होने चाहिए। हालांकि अगर ईरान पर हमला होता है तो जवाब देना उसकी मजबूरी बन जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि जवाबी कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि ईरान का किसी पड़ोसी देश से विवाद है या वह वहां के लोगों को नुकसान पहुंचाना चाहता है।अपने बयान में उन्होंने कहा कि बार-बार कहा गया है कि हम भाई हैं और हमें पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए। हालांकि, हमें हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ता है, लेकिन इसक