पश्चिम एशिया में तनाव बीते एक हफ्ते से जारी है। ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के हमले के बाद संकट हर दिन के साथ बढ़ता जा रहा है। ये युद्ध कितना लंबा चलेगा, इसे लेकर दोनों ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध पर भारत में भी सियासत जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अवधेश कुमार और पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी मौजूद रहे। राकेश शुक्ल: हमारे सबके साथ संबंध हैं। रूस के साथ भी हमारे संबंध रहे हैं। ईरान के साथ भी हमारे संबंध रहे हैं। अमेरिका के साथ भी। जहां तक दबाव की बात कही जा रही है, तो 2008 में जब न्यूक्लियर डील हुई थी, तब भी भारत दबाव में नहीं था और आज भी भारत दबाव में नहीं है। ईरान के साथ हमारे सामाजिक रिश्ते कभी नहीं रहे। हमेशा से हमारे संबंध व्यापारिक रिश्ते रहे हैं। जेके त्रिपाठी: भारत हमेशा से इस पक्ष में रहा है कि वह हर गुट के साथ है। वो अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से सभी के साथ रहा है। लेकिन हमने अपनी स्वायत्ता से कभी समझौता नहीं किया। हमने हमास के हमले का भी विरोध किया और हमने इस्राइल के हमले का भी विरोध किया। इसी तरह हमने यूएन में कुछ प्रस्तावों में रूस के पक्ष में वोट किया। इसी तरह हमने कुछ प्रस्तावों में यूक्रेन के पक्ष में भी वोट किया। हमने हमेशा उस पक्ष का साथ दिया जो शांति की बात करता है। पुराना वैश्विक ऑर्डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। नया वैश्विक ऑर्डर तैयार हो रहा है। धीरे-धीरे अमेरिका का प्रभुत्व खत्म होने वाला है। अवधेश कुमार: वो युद्ध न हमारा है, न हम वहां लड़ रहे हैं, न ही लड़ने वाले हैं, फिर हम इतनी चिंता क्यों …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Khabaron Ke Khiladi: ईरान में जारी युद्ध में भारत की नीति कितनी सही, जानें विश्लेषकों का सटीक विश्लेषण
पश्चिम एशिया में तनाव बीते एक हफ्ते से जारी है। ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के हमले के बाद संकट हर दिन के साथ बढ़ता जा रहा है। ये युद्ध कितना लंबा चलेगा, इसे लेकर दोनों ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध पर भारत में भी सियासत जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अवधेश कुमार और पूर्व राजनयिक जेके त्रिपाठी मौजूद रहे। राकेश शुक्ल: हमारे सबके साथ संबंध हैं। रूस के साथ भी हम