इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग-2026 में कहा कि यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि जहाज और उसका चालक दल अचानक बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फंस गए थे। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, आईआरआईएस लावन ने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था और 15-25 फरवरी के बीच हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन- 2026 के तहत ईरानी नौसेना की तैनाती के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में मौजूद था।सूत्रों ने बताया कि श्रीलंका के दक्षिण में आईआरआईएस देना की घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से इस जहाज को तत्काल ठहराने का अनुरोध किया था। 28 फरवरी को भारत को यह अनुरोध मिला था, जिसमें बताया गया था कि जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है और उसे कोच्चि में खड़ा करना जरूरी है। भारत ने एक मार्च को इस अनुरोध को स्वीकार किया और इसके बाद 4 मार्च को आईआरआईएस लावन कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया। फिलहाल जहाज के चालक दल के सदस्य कोच्चि में नौसैनिक सुविधाओं में रह रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जहाज पर कुल 183 सदस्य हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
IRIS Lavan: संकट में फंसे ईरान ने क्यों जताया भारत का आभार? US की बमबारी के बीच युद्धपोत की सुरक्षा पर की बात
इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग-2026 में कहा कि यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा कि जहाज और उसका चालक दल अचानक बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में फंस गए थे। भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, आईआरआईएस लावन ने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था और 15-25 फरवरी के बीच हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन- 2026 के तहत ईरानी नौसेना की तैनाती के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में मौजूद था।सूत्रों ने बताया कि श्रीलंका के दक्षिण में आईआरआईएस देना की घटना