और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं ईरान ने जहाज को तुरंत डॉक करने की भारत से मांगी थी अनुमति ईरान का युद्धपोत आईरिस लावन 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और युद्धाभ्यास मिलन 2026 में शामिल होने के लिए आया था। 28 फरवरी को ईरान की सरकार ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि गंभीर तकनीकी समस्याओं के कारण पोत को तुरंत कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति दी जाए। गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमले भी 28 फरवरी को ही शुरु हुए थे। भारत ने 1 मार्च को ईरान के जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति दे दी। जिसके बाद आईरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया और फिलहाल कोच्चि में ही डॉक है। आईरिस लावन के चालक दल के 183 सदस्य फिलहाल कोच्चि में स्थित नौसैन्य सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को बनाया था निशाना सरकारी सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र में अन्य जहाजों की मौजूदगी के कारण जानकारी साझा करने में देरी हुई। इससे पहले 4 मार्च को ईरानी नौसेना के युद्धपोत आईरिस डेना को श्रीलंका के दक्षिण में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा निशाना बनाया गया। इस हमले में चालक दल के 180 सदस्यों में से 87 के मारे जाने की खबर है। हमले के बाद श्रीलंकाई नौसेना द्वारा 32 लोगों को बचाया गया, जिनका श्रीलंका के अस्पताल में इलाज चल रहा है। भारत ने भी आईरिस डेना की मदद के लिए अभियान चलाया गया और भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत आईएनएस तरंगिनी और आईएनएस इक्षक के साथ-साथ अपने पी8आई गश्ती विमानों को भी तैनात किया। ये भी पढ़ें- ईरान का युद्धपोत आईरिस लावन 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू और युद्धाभ्यास मिलन 20 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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