त्रिलोकपुरी निवासी हुस्ना खान को बेटी मरियम की फिक्र खाए जा रही है। उनकी बेटी 12वीं कक्षा पास करने के बाद ईरान के उर्मिया शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने के गई है। मरियम की याद में उनकी आंखें नम हो जाती है। बेटी से संपर्क होता है, तो वह बेटी से हिम्मत रखने के लिए कहती है। उन्हें यकीन है कि देश की सरकार उनकी बेटी को सुरक्षित वतन वापस ले आएगी। डॉक्टर अली ने बताया कि वह मूल रूप से नाला सोपारा, मुंबई के रहने वाले हैं। उनके बेटे मोहम्मद आसिफ अली डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर ईरान के शहर तेहरान गए हैं। बेटे को रमजान पर घर आने के लिए कहा था, लेकिन द्वितीय वर्ष की परीक्षा होने की वजह से वह नहीं आ सके। युद्ध की जब से खबर सुनी तब से पूरे परिवार को आसिफ की फिक्र होने लगी। युद्ध के 24 घंटे बीत जाने के बाद जब अली का बेटे से संपर्क हुआ, तो उसने राहत भरी सांस ली। अली ने बताया कि बेटे से बात करने के बाद उसने ईरान दूतावास को मेल भी किया है। वहीं, उसने भारतीय दूतावास से भी बेटे के वतन वापसी को लेकर मदद की गुहार लगाई हैं। उन्हें यकीन हैं कि देश की सरकार उनके लाल को सकुशल देश ले आएंगे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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