सूत्रों के अनुसार ईरान-इराक सीमा के पास सक्रिय कुर्द लड़ाकों को हथियार और सैन्य सहयोग देने की योजना पर बातचीत चल रही है। मकसद यह बताया जा रहा है कि पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बलों पर दबाव बनाया जाए ताकि बड़े शहरों में शासन के विरोध में उठने वाली आवाजों को ताकत मिल सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने इराकी कुर्द नेतृत्व से भी संपर्क किया है, ताकि कुर्दिस्तान क्षेत्र को संभावित ‘लॉन्चिंग ग्राउंड’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। योजना यह है कि कुर्द बल ईरानी सुरक्षा तंत्र को उलझाए रखें, जिससे आंतरिक असंतोष को संगठित रूप मिल सके।एक वरिष्ठ कुर्द अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी ईरान में सीमित स्तर पर जमीनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में यह कुर्द गुटों के लिए ‘रणनीतिक अवसर’ हो सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी एजेंसियां यह भी आकलन कर रही हैं कि उत्तरी ईरान में कुर्दों की पकड़ मजबूत होने से क्षेत्र में एक तरह का बफर जोन बन सकता है, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर पड़ेगी। हालांकि, अभी तक इस पूरे ऑपरेशन को लेकर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।इस बीच ईरान पहले ही कुर्द संगठनों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है और IRGC की ओर से सीमावर्ती इलाकों में हमले तेज किए गए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर कुर्दों को खुला सैन्य समर्थन मिला, तो यह संघर्ष केवल सीमा तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।इधर, सऊदी अरब ने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। सऊदी अरब की कैबिनेट बैठक क्राउन प्रिंस मोहम्मद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें