अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन लंबे समय से बनाई जा रही रणनीति का हिस्सा था। संयुक्त प्रमुख समिति के अध्यक्ष एयर फोर्स जनरल डैन कैन ने पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अभियान राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 28 फरवरी को शुरू किया गया। शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर हमले किए गए ताकि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर की जा सके।जनरल केन के अनुसार ऑपरेशन में 100 से अधिक लड़ाकू और सहायक विमान शामिल किए गए। इनमें फाइटर जेट, टैंकर विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक अटैक प्लेटफॉर्म और बिना पायलट वाले ड्रोन शामिल थे। इसके अलावा लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों ने भी मिशन में हिस्सा लिया। अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और नौसैनिक बलों ने समुद्र से लगातार हमले किए।अधिकारियों ने बताया कि सीधे बमबारी से पहले अमेरिकी साइबर कमांड और स्पेस कमांड ने ईरान की निगरानी और संचार प्रणाली को निशाना बनाया। इन गैर-सैन्य लेकिन रणनीतिक हमलों के जरिए ईरान की प्रतिक्रिया क्षमता को बाधित किया गया। इसके बाद काइनेटिक स्ट्राइक यानी वास्तविक सैन्य हमले शुरू हुए, जिनमें भूमिगत ठिकानों तक को निशाना बनाया गया।अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अमेरिका से उड़ान भरकर करीब 37 घंटे का लंबा मिशन पूरा किया और गहरे भूमिगत ठिकानों पर बम गिराए। लगभग 57 घंटों के भीतर संयुक्त अमेरिकी बलों ने जमीन और समुद्र से सैकड़ों मिशन लॉन्च किए और हजारों गोला-बारूद इस्तेमाल किए। इस ऑपरेशन को तकनीकी और सैन्य समन्वय का बड़ा उदाहरण बताया गया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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