मैक्रों ने उत्तर-पश्चिम फ्रांस के एल-इल लॉन्ग सैन्य अड्डे पर यह घोषणा की, जहां फ्रांस की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां तैनात हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फ्रांस के पास 300 से कम परमाणु वारहेड हैं और अब उनकी संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कुल संख्या कितनी बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रपति ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फ्रांस की परमाणु शक्ति भविष्य में भी मजबूत और प्रभावी बनी रहे।मैक्रों का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप में सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यूरोपीय देशों में यह चिंता बढ़ रही है कि भविष्य में अमेरिका की सुरक्षा गारंटी कितनी मजबूत रहेगी। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ समय-समय पर पैदा हुए तनावों ने यूरोप को अपनी रक्षा नीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर किया है। इसी पृष्ठभूमि में फ्रांस ने अपनी परमाणु क्षमता मजबूत करने का संकेत दिया है।फ्रांस यूरोपीय संघ का इकलौता देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस की परमाणु क्षमता पूरे यूरोप की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फ्रांस को अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा तो कोई भी देश इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाएगा। उनका कहना था कि परमाणु प्रतिरोध ही बड़े युद्ध को रोकने का सबसे मजबूत साधन है।फ्रांस पहले ही यूरोपीय साझेदार देशों के साथ परमाणु सुरक्षा सहयोग पर चर्चा शुरू कर चुका है। जर्मनी सहित कुछ देशों ने फ्रांस के साथ परमाणु अभ्यास और सुरक्षा रणनीति पर बातचीत में रुचि दिखाई है। चर्चा यह भी हुई है कि भविष्य में यूरोपीय देशों की सैन्य भागीदारी बढ़ाई जा सकती है, हालांकि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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