पश्चिम एशिया में भड़की भीषण जंग ने पूरी दुनिया को दो स्पष्ट कूटनीतिक ध्रुवों में विभाजित कर दिया है। शनिवार सुबह जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के मिसाइल उद्योग व उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की, तो वैश्विक राजनीति की लकीरें और गहरी हो गईं। ईरान में हुए मिसाइल हमलों के बाद वाशिंगटन ने इसे ईरानी शासन से खतरों को खत्म करने का मिशन बताया है। इस्त्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसे अस्तित्व की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ईरानी जनता को अपना भाग्य खुद चुनने का अवसर मिलेगा। संघर्ष शुरू होने के बाद भारत के कश्मीर से लेकर जर्मनी व ब्रिटेन तक कहीं इसके विरोध तो कहीं पक्ष में प्रदर्शन हुए हैं। ईरान के हमले की कई इस्लामी देशों ने भी आलोचना की है और अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले का समर्थन किया है। यूक्रेन, कतर, यूएई, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब आदि देशों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यूएई ने ईरान के हमले को कायराना हरकत करार देते हुए जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही है, जबकि सऊदी अरब ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यूक्रेन ने भी इस तनाव के लिए सीधे तौर पर ईरान के आंतरिक दमन और हालिया महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को जिम्मेदार ठहराया है।यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस व ब्रिटेन ने ईरान से अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई रोकने व वार्ता दोबारा शुरू करने की अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान में कहा, हम पश्चिम एशियाई देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। बेल्जियम ने कहा, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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