इस हफ्ते एनसीआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक पर बावल हुआ। किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अंशों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम या अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पूरे मामले पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। अनुराग वर्मा: अगर न्याय के लिए लाखों केस हमारी अदालतों में पेंडिंग है तो वो हमारे बच्चों को क्यों नहीं पता होना चाहिए? अगर न्याय बहुत महंगा है तो वो हमारे बच्चों को क्यों पता नहीं होना चाहिए? बहुत सी खामियां होने के बाद भी हमारी अदालतों को आज तक सवाल नहीं उठाया गया। अवधेश कुमार: सरकारें न्यायपालिका से नहीं लड़ती हैं। अगर चीफ जस्टिस को इतना लगा है तो कुछ नहीं कहा जा सकता है। जिस चैप्टर पर सारा बवाल हो रहा है उसमें क्या है, किसी ने नहीं देखा कि जो लिखा गया है वो तथ्यात्मक रूप से सही है या गलत? यह अध्याय बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए या नहीं इस पर बहस हो सकती है। लेकिन कुल मिलाकर मुझे लगता है कि इस अध्याय को सुप्रीम कोर्ट को इस तरह से लेना चाहिए कि हमारे यहां न्यायपालिका में व्यापक रिफॉर्म की जरूरत है। पूर्णिमा त्रिपाठी: एक आम आदमी अगर कोर्ट जाता है तो कितना परेशान हो जाता है, ये हम सभी को पता है। ये किस कक्षा के बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए इस पर बहस हो सकती थी। लेकिन पढ़ाया ही नहीं जा सकता ये मुझे सही नहीं लगता है। अगर न्यायापालिका इतनी ही संवेदन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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