1 of 5 सचिन-विराट-सिराज-रिंकू - फोटो : ANI-ICC Link Copied भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे पल आए हैं जब खिलाड़ियों को अपने निजी जीवन और देश के बीच कठिन चुनाव करना पड़ा। कुछ ने अंतिम संस्कार के लिए घर लौटकर फिर मैदान संभाला, तो कुछ ने दिल पर पत्थर रखकर देश के लिए खेलना जारी रखा। इन घटनाओं में सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग और भावनाओं की गहराई झलकती है। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 5 रिंकू सिंह और उनके माता-पिता - फोटो : Rinku Singh (instagram) रिंकू सिंह: शोक के बीच जिम्मेदारी हाल ही में रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया। वह लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। पिता के अंतिम दर्शन के लिए रिंकू अलीगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। ऐसे कठिन समय में उनका वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में खेलना संदिग्ध माना जा रहा था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि रिंकू शनिवार को कोलकाता में टीम से जुड़ेंगे। यह फैसला बताता है कि एक बेटा अपने पिता को अंतिम विदाई देने के बाद भी अपने पेशेवर दायित्व से पीछे नहीं हटता। रिंकू के संघर्षों में उनके पिता की अहम भूमिका रही थी। अब उसी सपने को आगे बढ़ाना उनके लिए पुत्र धर्म के साथ-साथ राष्ट्र धर्म भी है। 3 of 5 विराट कोहली और उनके पिता - फोटो : ANI-Virat Kohli (instagram) विराट कोहली: 18 साल की उम्र में असाधारण निर्णय आज दुनिया के महान बल्लेबाजों में शुमार विराट कोहली के जीवन में 18 दिसंबर 2006 की रात हमेशा के लिए दर्ज है। रणजी ट्रॉफी में दिल्ली बनाम कर्नाटक मुकाबले के दौरान उनके 54 वर्षीय पिता प्रेम कोहली का दिल का द …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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