पहले इतना तमाशा नहीं होता था: अभय सिन्हा, इम्पा के अध्यक्ष ‘आज फिल्म का टाइटल पास करना सबसे मुश्किल काम हो गया है। पहले नामों पर इतना विवाद नहीं होता था। आज हर नाम पर लोग धार्मिक या राजनीतिक एंगल ढूंढ लेते हैं। इसके चलते हमें भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।’ कुछ लोग 10–10 टाइटल बुक कर लेते थे: संग्राम शिर्के, अध्यक्ष, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ‘टाइटल पर आज पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता बरती जाती है। हम IMPAA के साथ मिलकर टाइटल बुक करते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि कहीं दो फिल्मों का नाम एक जैसा न हो, वर्ना सीधे प्रोड्यूसर का नुकसान होता है। पहले तो कई लोग 10 टाइटल बुक कराकर बैठ जाते थे और बाद में दूसरों को ब्लैकमेल करते थे। ऐसे में अब हमने हर टाइटल को तीन साल के लिए ही मान्य कर दिया है। अगर फिल्म नहीं बनती तो टाइटल वापस ले लेते हैं।’ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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