2024 में एनसीईआरटी ने राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटा दिया। पाठ्यपुस्तक से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटाना शामिल रहा। एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम मसौदा समिति द्वारा तैयार किए गए परिवर्तनों का विवरण देने वाले एक दस्तावेज के अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन के संदर्भों को “राजनीति में नवीनतम बदलावों के अनुसार बदला गया है। इसके अलावा 2002 के गोधरा दंगों से जुड़े विषय में भी बदलाव किया गया है।जुलाई 2025 में भी मुगलकाल से लेकर शिवाजी तक को लेकर इतिहास की किताबों में कुछ बदलाव किए गए। इसके अलावा दिल्ली सल्तनत से जुड़े इतिहास को बर्बर करार देने के साथ मुगल काल में बाबर, अकबर और औरंगजेब के शासनकाल को खास तौर पर असहिष्णु करार देते हुए इन्हें क्रूरता से जोड़ा गया था। हालांकि, किताब में एक दिशा-निर्देश भी जोड़ा गया था, जिसमें कहा गया है कि इतिहास के काले अध्याय को बिना किसी दुराग्रह के पढ़ा जाना जरूरी है, वह भी आज के समय में किसी को दोष दिए बिना, ताकि इतिहास की गलतियों को सुधारा जा सके और एक ऐसे भविष्ट की परिकल्पना की जा सके, जिसमें ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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