16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव होना है, जिसमें पांचवें सीट पर घमासान मचा हुआ है। राज्य सभा की पांच सीट खाली हो रही हैं, जिसमें बिहार में एनडीए के जीते हुए सीट के अनुसार चार सीट एनडीए के पक्ष में जा सकता है, लेकिन पांचवें सीट के लिए कशमकश जारी है। आंकड़ों के गणित के अनुसार राज्यसभा में एक सदस्य भेजने के लिए 41 सीटों की जरूरत होती है और पांच सीटों पर 205 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। एनडीए के पास 202 सीटें हैं उस हिसाब से 4 सदस्यों को भेजने में कोई संकट नहीं होगी। पांचवे सदस्य के लिए एनडीए के पास मात्र 38 (202-164) सीट बचे हैं। एनडीए को अब 38 के बाद तीन सीट और चाहिए होगा, जिसके लिए जुगत चल रही है।अब महागठबंधन के गणित को भी समझिए। महागठबंधन खेमे में राजद के पास फिलहाल 25 सीट है। अगर पूरे महागठबंधन की सीटों को जोड़ दें तो महागठबंधन के पास कुल 35 सीटें हैं। राज्यसभा में एक सदस्य भेजने के लिए 41 सीटों की जरूरत होती है। यह संख्या कैसे पूरी होगी? दरअसल इसी को पूरा करने के लिए राजद के मनेर विधायक भाई वीरेन्द्र ने यह बयान दिया कि हीना साहेब को महागठबंधन राज्य सभा भेजा जा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि यह संख्या पूरी कैसे होगी? अब इस गणित को समझिए।अगर राजद को एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक समर्थन मिल जाए तो वह अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकता है। लेकिन, यह मुमकिन होगा कैसे? क्यों कि बिहार विधान सभा चुनाव में जब यही पार्टी राजद को महागठबंधन में शामिल होने के लिए राबड़ी आवास तक ढ़ोलबाजे के साथ आने के बाद भी राजद ने एआईएमआईएम पार्टी को महागठबंधन में शामिल नहीं किया था। इसलिए दो दिन पहले ही एआईएमआईएम दल के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने घोषणा करते हुए कहा था कि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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