पश्चिम बंगाल की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। परिवार के अनुसार, उन्होंने सोमवार सुबह करीब 1:30 बजे एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से कोमा में थे। करीब चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में मुकुल रॉय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तीनों दलों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे रॉय रॉय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की और 1998 में ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में वह जल्द ही संगठन के प्रमुख स्तंभ बन गए और राष्ट्रीय महासचिव के पद तक पहुंचे। टीएमसी से मतभेद के बाद भाजपा का दामन थामा रॉय 2006 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 में उच्च सदन में टीएमसी के नेता बने। यूपीए-2 सरकार में, जब टीएमसी सहयोगी दल थी, उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में और बाद में 2012 में रेल मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। 2011 में वाम मोर्चा के 34 साल पुराने शासन के अंत के बाद राज्य में टीएमसी के संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में भी उनकी अहम भूमिका रही। हालांकि उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी घिरा रहा। शारदा चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनका नाम सामने आया, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व से उनके संबंधों में दरार आ गई। 2017 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और बंगाल में पार्टी के संगठन को मजबूत करने व 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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