प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा से पहले न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रेवाच ने कहा, ‘पीएम नेतन्याहू ने विशेष रूप से कहा कि इस यात्रा का एक पहलू रक्षा सहयोग है। हम निश्चित रूप से भारत के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने और उसे उन्नत करने का प्रयास करेंगे।‘रेवाच ने बताया कि सबसे पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग जारी है, जो कि बेहद अनूठा और मजबूत है, क्योंकि हम दोनों देशों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब पीएम मोदी की इस विशेष यात्रा के दौरान हम इस समझौते का विस्तार करते हुए कुछ विशिष्ट विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं।उन्होंने बताया कि भारत में विनिर्माण, रक्षा सहयोग, और साथ ही इस्राइल में आयरन डोम और अन्य रक्षा प्रणालियों से संबंधित सहयोग, जिनकी तकनीक हम भारत में अपने सहयोगियों के साथ साझा कर सकते हैं।उन्होंने आगे कहा कि कट्टरपंथी नजरिये से निपटने के लिए इस्राइल भारत, अब्राहम समझौते के राज्यों, कुछ अफ्रीकी देशों और साइप्रस और ग्रीस सहित पश्चिम एशिया के देशों के साथ एक अलग गठबंधन स्थापित करने के लिए उत्सुक है। रेवाच ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी इस सप्ताह इस पहल को बढ़ावा देने के लिए इस्राइल का दौरा करेंगे।‘इस्राइल की रक्षा में सबसे बड़ा पहरा आयरन डोम को ही माना जाता है। जब कोई रॉकेट सीमा में प्रवेश करता है, तो आयरन डोम के रडार उसकी पहचान करते हैं और कंप्यूटर सिस्टम तय करता है कि वह रॉकेट आबादी वाले क्षेत्र में गिरेगा या नहीं। अगर हां, तो इंटरसेप्टर मिसाइल तुरंत दागी जाती है और हवा में ही उसे नष्ट कर देती है। ईरान के हमलों से पहले गाजा से हमास …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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