आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच कॉरपोरेट जगत और आम लोगों में यह डर सता रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी? सिस्को के प्रेसिडेंट और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर जीतू पटेल ने इन चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका मानना है कि एआई इंसानों को बेमानी नहीं बनाएगा, बल्कि यह मानवीय क्षमता और मूल्य को और बढ़ाएगा। मशीनें सहानुभूति, रचनात्मकता और समाज में योगदान देने की इंसानी फितरत की नकल नहीं कर सकती हैं। कार्यस्थलों पर एआई ‘डिजिटल सहकर्मियों’ के रूप में काम करेगा। इंसान अब उच्च-स्तरीय निर्णय लेने, रचनात्मकता और समस्याओं को सुलझाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। जीवन को केवल ‘समुद्र तट को घूरने’ तक सीमित कर देना जीवन के उद्देश्य को ही चुनौती देगा, क्योंकि इंसानों में स्वभाव से ही कुछ नया बनाने और समाज में मूल्य जोड़ने की जन्मजात इच्छा होती है। पटेल के अनुसार, असली कामयाबी तब मिलती है जब इंसानी समझ और निर्णय लेने की क्षमता को एआई के ऑटोमेशन के साथ मिलाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चैटबॉट से लेकर ऑटोनॉमस एजेंट तक, एआई सिस्टम तेजी से उन्नत हो रहे हैं, लेकिन इन्हें इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, न कि उन्हें बदलने के लिए। पटेल ने अपनी मां के अस्पताल में भर्ती होने का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी एआई किसी नर्स की जगह नहीं ले सकता। इंसानों में प्यार, समझ और देखभाल की बुनियादी जरूरत होती है, जिसे कोई मशीन पूरा नहीं कर सकती है।ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पटेल ने माना कि काम का तरीका बदलेगा और कुछ पुरानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि हर नौकरी का स …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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