कौन-कौन से देश हैं पैक्स सिलिका का हिस्सा? इस महा-गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया, इस्राइल, जापान, नीदरलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं, जबकि ताइवान एक पर्यवेक्षक की भूमिका में है। हाल ही में यूएई और कतर जैसे देशों के जुड़ने से इस समूह को सस्ती ऊर्जा का भी लाभ मिला है। इस पारिस्थितिकी तंत्र में अमेरिका डिजाइन, सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा (आईपी) का नेतृत्व कर रहा है। ताइवान अपनी दिग्गज कंपनी टीएसएमसी (टीएसएमसी) के जरिए उन्नत चिप्स का निर्माण कर रहा है, जबकि जापान और नीदरलैंड लिथोग्राफी जैसे जटिल उपकरणों की आपूर्ति में अपना एकाधिकार रखते हैं। पैक्स सिलिका समूह में भारत के शामिल होने का क्या मतलब? अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद कूटनीतिक संबंधों में आई गर्माहट के चलते भारत ने इस गठबंधन में अपनी जगह पक्की की है। भारत की यह एंट्री दुनिया को एक स्पष्ट संदेश है कि कोई भी ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति नई दिल्ली के बिना पूरी नहीं हो सकती। भारत इस गठबंधन की मेज पर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ पृथ्वी भंडार, 1.45 अरब नागरिकों का डेटा और एक विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश लेकर आया है। इसके अलावा, दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइनर पहले से ही भारत में मौजूद हैं, जो इसे चिप डिजाइन का ग्लोबल पावरहाउस बनाते हैं। पैक्स सिलिका में शामिल होने से ‘सेमीकॉन इंडिया’ को जबर्दस्त रफ्तार मिलेगी, विदेशी निवेश (एफडीआई) आएगा और टाटा ग्रुप जैसी भारतीय कंपनियों को माइक्रोन जैसी ग्लोबल चिप कंपनियों के साथ काम करने का बड़ा मौका मिलेगा। भारत अब चिप्स का केवल उपभोग नहीं करेगा, बल्कि असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) में भी अपना दबदबा बनाएगा। पैक्स सिलिका में शामिल ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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