और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स के अनुसार 2020 में वैश्विक एआई निवेश लगभग 58 बिलियन डॉलर था, जो 2024 के अंत तक बढ़कर 335 बिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया। इसमें निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल, कॉरपोरेट आरएंडडी और सरकारी फंडिंग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 2023 और 2024 में जनरेटिव एआई के उभार के बाद निवेश की रफ्तार अचानक तेज हुई जब ओपनएआई, एन्थ्रॉपिक, गूगल डीपमाइंड और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों में अरबों डॉलर झोंके गए। सीबी इनसाइट्स और पिचबुक के अनुसार, अकेले 2024 में ही जनरेटिव एआई स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर 70 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग मिली, जो 2020 की कुल एआई फंडिंग से भी ज्यादा थी। रिपोर्ट के मुताबिक कुल वैश्विक एआई निवेश का लगभग 55% हिस्सा अमेरिका के खाते में गया। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन और एनवीडिया जैसी कंपनियों की भारी आरएंडडी खर्च ने अमेरिका की बढ़त को और मजबूत किया। चीन करीब 20% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। भारत निवेश के मामले में तीसरे सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभरा। यूएनसीटीएडी व पिचबुक के अनुसार 2020 से 2024 के बीच भारत में एआई निवेश 600% बढ़ा, हालांकि कुल राशि अभी अमेरिका और चीन से काफी कम है। ये भी पढ़ें: जेनरेटिव एआई बना निवेश का सबसे बड़ा ड्राइवर स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2025 के मुताबिक कुल नए निवेश का लगभग 40% हिस्सा जनरेटिव एआई से जुड़ी कंपनियों में गया। चैटबॉट, इमेज और वीडियो जनरेशन, हेल्थकेयर एआई और ऑटोमेशन टूल्स ने निवेशकों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। माइक्रोसॉफ्ट का ओपनएआई में 13 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश और अमेजन-गूगल की क्लाउड आधारित एआई रणनीतियां इस ट्रेंड की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें