अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल टाउनशिप और क्षेत्रीय विकास 450 MVA गैस और सौर आधारित पावर प्लांट लेदरबैक समुद्री कछुए के संरक्षण निकोबार मेगापोड पक्षी खारे पानी के मगरमच्छ निकोबार मकाक और रॉबर क्रैब मैंग्रोव पुनर्स्थापन और कोरल ट्रांसलोकेशन शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के हितों की रक्षा इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत:पर्यावरणीय मंजूरी को पहले भी चुनौती दी गई थी, जिसमें आईलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।एनजीटी ने कहा कि पहले दौर की सुनवाई में भी पर्यावरणीय मंजूरी में हस्तक्षेप से इनकार किया गया था और जिन मुद्दों की पहचान की गई थी, उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने संबोधित किया है। अदालत ने माना कि यह परियोजना राष्ट्रीय और सामरिक दृष्टि से अहम है, लेकिन पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित यह परियोजना भारत की समुद्री और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर दिया गया है।एनजीटी ने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति में विशेष रूप से निम्न संरक्षण उपाय शामिल किए गए हैं:ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया कि तटरेखा में किसी प्रकार का कटाव या परिवर्तन न हो और द्वीप के रेतीले समुद्र तट सुरक्षित रहें, क्योंकि ये कछुओं और पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण घोंसला स्थल हैं।एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना का रणनीतिक महत्व नकारा नहीं जा सकता। साथ ही, आईसीआरजेड अधिसूचना की शर्तों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। ट्रिब्यूनल ने यह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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