सम्मेलन में बोलते हुए रेडमंड ने कहा कि जब वह वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों से बात करती हैं, तो एक स्पष्ट ट्रेंड दिखाई देता है- राष्ट्र ‘लॉन्ग गेम’ (लंबी पारी) खेलने की तैयारी में हैं। वे केवल पहली रिलीज या किसी एक एप्लिकेशन के सफल होने का इंतजार नहीं कर रहे। इसके बजाय, उनकी नजर पूरे टेक्नोलॉजी स्टैक पर है।रेडमंड ने बताया कि सरकारें अब हार्डवेयर, फाउंडेशनल मॉडल्स और उस इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने पर जोर दे रही हैं जो बेहतरीन एप्लिकेशंस बनाने के लिए जरूरी है। यह दृष्टिकोण केवल सॉफ्टवेयर खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू स्तर पर डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसे ही ‘सोवेरन एआई’ का नाम दिया गया है, जिसमें स्थानीय टीमों द्वारा स्थानीय डेटासेट पर प्रशिक्षित लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स शामिल हैं।समिट के दौरान टेक लीडर्स ने ‘ओपन सोर्स एआई’ की भूमिका पर भी गहन चर्चा की। मोजिला के अध्यक्ष मार्क सुरमन ने इस बात पर जोर दिया कि एआई का केंद्रीकरण किसी भी देश की डिजिटल संप्रभुता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।सुरमन के अनुसार, ओपन वेब और ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी इस खतरे का जवाब हैं। उन्होंने कहा कि ओपन सोर्स की मूल भावना यही है कि कोई भी, कहीं भी, अपनी शर्तों पर तकनीक का निर्माण कर सके। हालांकि इसमें अपनी चुनौतियां हैं, लेकिन यह तकनीक को इस तरह डिजाइन करने की आजादी देता है जिससे देशों को अपनी संप्रभुता बनाए रखने का बेहतर मौका मिलता है। रेडमंड ने भी माना कि दशकों से ओपन सोर्स एक ‘ग्रेट लेवलर’ (समान अवसर प्रदान करने वाला) रहा है।भारत सरकार की रणनीतियां रेडमंड के इन विचारों से पूरी तरह मेल खाती हैं। भारत का ‘इंडिया एआई मिशन’ एक व्याप …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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