डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीनों में एफपीआई ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में बिकवाली की थी। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपए, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपए और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपए निकाले थे। लगातार निकासी से घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बना रहा और इससे वैश्विक निवेशकों की सतर्क सोच भी झलकती रही। साल 2025 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपए (लगभग 18.9 अरब डॉलर) निकाल चुके हैं। यह आंकड़े हाल के वर्षों में विदेशी निवेश के लिहाज से सबसे कमजोर दौरों में से एक माना जा रहे हैं। बिकवाली की बड़ी वजहों में रुपए में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिका की संभावित टैरिफ नीतियों की चिंता और भारतीय बाजार में ऊंचे शेयर मूल्य शामिल रहे। हालांकि, फरवरी में सुधार के संकेत दिखे हैं। 13 फरवरी तक हुई 11 ट्रेडिंग सत्रों में से 7 दिन एफपीआई ने खरीदारी की, जबकि 4 दिन उन्होंने बिकवाली की। ज्यादातर दिनों में खरीदारी के बावजूद इस महीने अब तक के आंकड़े बताते हैं कि एफपीआई ने कुल मिलाकर 1,374 करोड़ रुपए के शेयर शुद्ध रूप से बेचे हैं।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया निवेश से विदेशी निवेशकों का भरोसा बेहतर होता दिख रहा है, लेकिन इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए वैश्विक बाजारों में स्थिरता और व्यापार व मौद्रिक नीतियों पर स्पष्टता जरूरी होगी।इसी बीच, शुक्रवार (13 फरवरी) को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर बाजार पर दिखा। इस दौरान, बीएसई का प्रमुख सूचकांक 1,048 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 82,626.76 पर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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