आखिर भारतीय बाजार में अचानक इतनी दहशत क्यों है? ट्रिगर क्या था? जवाब: भारतीय शेयर बाजार के आईटी शेयरों में आई सुनामी का केंद्र बिंदु 30 जनवरी 2026 है। इसी दिन अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने क्लॉड कोवर्क प्लेटफॉर्म के लिए 11 नए ऑटोमेशन प्लग-इन्स लॉन्च किए। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली क्योंकि ये प्लग-इन्स उन कार्यों को मिनटों में कर सकते हैं, जिनके लिए भारतीय आईटी कंपनियां हजारों इंजीनियरों का इस्तेमाल करती थीं। इसे विश्लेषकों ने ‘SaaSpocalypse’ यानी (सॉफ्टवेयर सेवाओं का अंत) जैसे नामों से नवाजा है। सवाल: क्या एआई वाकई भारतीय आईटी कंपिनयों के ‘बिजनेस मॉडल’ को खत्म खत्म कर सकता है? जवाब: खतरा वास्तविक और गंभीर है। भारतीय आईटी कंपनियों का का पारंपरिक बिजनेस मॉडल ‘श्रम मध्यस्थता’ और ‘प्रति घंटा बिलिंग’ पर आधारित रहा है। यानी, जितने ज्यादा लोग और जितने ज्यादा घंटे, उतना ज्यादा मुनाफा। लेकिन एंथ्रोपिक के आने के बाद कहानी ही बदल गई है। यह कुछ अलग ही फंडे पर काम कर रहा है। जैसे- डेटा एनालिस्ट प्लग-इन: पहले जिस डेटा को साफ करने और विजअलाइज करने में विश्लेषकों की टीम को हफ्ते लगते थे और हजारों डॉलर खर्च होते थे, अब वही काम एआई बिना मानवीय हस्तक्षेप के 2-3 दिनों में कर रहा है। और लागत आ रही है? मात्र 30-40 डॉलर प्रति हर महीने।, दूसरी चीज है- लीगल प्लग-इन: हजारों पन्नों के कॉन्ट्रैक्ट और दस्तावेजों की समीक्षा अब एआई मिनटों में कर रहा है। जब महीनों का काम मिनटों में होगा और इंसान की जरूरत नहीं होगी, तो कंपनियां बिल किस बात का बनाएंगी? यही वह डर है जिसने ब्रोकरेज फर्मों को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों का 40% तक का राजस्व जोखिम में है। सवाल: …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
बेरहम बाजार: क्या एआई निगल जाएगा भारत की आईटी कंपनियों का भविष्य? 4.5 लाख करोड़ रुपये हवा हुए, अब आगे क्या?
आखिर भारतीय बाजार में अचानक इतनी दहशत क्यों है? ट्रिगर क्या था? जवाब: भारतीय शेयर बाजार के आईटी शेयरों में आई सुनामी का केंद्र बिंदु 30 जनवरी 2026 है। इसी दिन अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने क्लॉड कोवर्क प्लेटफॉर्म के लिए 11 नए ऑटोमेशन प्लग-इन्स लॉन्च किए। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली क्योंकि ये प्लग-इन्स उन कार्यों को मिनटों में कर सकते हैं, जिनके लिए भारतीय आईटी कंपनियां हजारों इंजीनियरों का इस्तेमाल करती थीं। इसे विश्लेषकों ने 'SaaSpocalypse' यानी (सॉफ्टवेयर सेवाओं का अंत) जैसे नामों से