कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वे जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशों को हर हाल में लागू करें। यह कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई गई थी। इस कमेटी में तीन पूर्व महिला जज शामिल हैं, जो अब तक पीड़ितों की मदद के लिए कई रिपोर्ट सौंप चुकी हैं।मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। हजारों लोग बेघर हुए हैं और कई घायल हुए हैं। यह हिंसा तब भड़की थी जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था।सुनवाई के दौरान पीड़ित की तरफ से पेश हुईं वकील वृंदा ग्रोवर ने एक पीड़ित महिला का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि गैंगरेप की शिकार एक कुकी महिला की पिछले महीने सदमे और बीमारी से मौत हो गई। वकील ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने चार्जशीट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और मुख्य आरोपी भी कोर्ट में पेश नहीं हो रहा है। उन्होंने जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इस पर सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मणिपुर में अब हालात पहले से बेहतर और शांतिपूर्ण हैं।चीफ जस्टिस ने कहा कि पीड़ितों को मुफ्त कानूनी मदद मिलनी चाहिए। अगर स्थानीय स्तर पर वकील उपलब्ध नहीं हैं, तो गुवाहाटी बार से वकील भेजे जा सकते हैं। वहीं, वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने शिकायत की कि उन्हें कमेटी की रिपोर्ट नहीं मिल रही है, जिससे पुनर्वास का काम धीमा पड़ा है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ संवेदनशील जानकारी हो सकती है, इसलिए उसे सावधानी से साझा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 26 फरवरी को अगली सुनवाई कर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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