बैठक के बाद नेतन्याहू ने मीडिया से कोई बयान नहीं दिया, लेकिन ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। ट्रंप ने कहा कि बैठक बहुत अच्छी रही और दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान से बातचीत जारी रखी जाए ताकि यह तय हो सके कि परमाणु डील संभव है या नहीं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता हो सकता है तो वही बेहतर रास्ता होगा।ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि ईरान के साथ ऐसा समझौता हो जिसमें परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल न हों। उन्होंने कहा कि पिछली बार ईरान ने समझौता नहीं किया और उसे अमेरिकी हमलों का सामना करना पड़ा। इस बार उम्मीद है कि ईरान ज्यादा जिम्मेदारी दिखाएगा। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर डील नहीं होती तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव और सैन्य तैयारी दोनों साथ रखे हुए है।नेतन्याहू का रुख है कि ईरान से होने वाली किसी भी बातचीत में उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास व हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों को मिलने वाले समर्थन का मुद्दा भी शामिल होना चाहिए। रवाना होने से पहले नेतन्याहू ने कहा कि वह बातचीत के जरूरी सिद्धांत ट्रंप के सामने रखेंगे, जो केवल इस्राइल ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े हैं। इस्राइल लंबे समय से मांग करता रहा है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे, हालांकि ईरान इस मांग को ठुकराता रहा है।ईरान और इस्राइल के बीच हाल में 12 दिन का युद्ध भी हो चुका है, जिसमें हवाई हमलों में दोनों पक्षों को नुकसान हुआ। अमेरिका ने भी ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। ट्रंप ने तब कहा थ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें