देश में पैक्ड खाने-पीने की चीजों पर बढ़ती निर्भरता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई से कहा है कि पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के सामने वाले हिस्से पर साफ चेतावनी लेबल लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि ज्यादा चीनी, फैट और नमक वाले उत्पादों से लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिलनी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन शामिल थे, एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई थी कि पैक्ड फूड पर सामने की तरफ बड़े और साफ चेतावनी लेबल अनिवार्य किए जाएं। अदालत ने कहा कि पहली नजर में यह मांग जनस्वास्थ्य के हित में लगती है। कोर्ट ने माना कि अगर किसी खाने में ज्यादा शुगर, सैचुरेटेड फैट और सोडियम है तो इसकी जानकारी पैकेट के सामने दिखनी चाहिए।सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि खाद्य कंपनियों का विरोध नियामक संस्था के कर्तव्य से बड़ा नहीं हो सकता। उपभोक्ताओं की सेहत की रक्षा करना एफएसएसएआई की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर प्राधिकरण ने इस मुद्दे पर लगातार देरी की तो अदालत को दखल देना पड़ सकता है। अदालत ने एफएसएसएआई को चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब रिकॉर्ड पर दाखिल करने का निर्देश दिया है।याचिका में कहा गया कि अभी पोषण से जुड़ी जानकारी ज्यादातर पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी होती है। आम ग्राहक खरीदते समय इसे पढ़ नहीं पाता या समझ नहीं पाता। पैक्ड फूड का चलन तेजी से बढ़ा है, ऐसे में सामने चेतावनी चिन्ह या रंग आधारित लेबल से ग्राहक तुरंत समझ सकेगा कि उत्पा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Supreme Court: पैक्ड खाने पर चेतावनी लेबल लगाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- FSSAI इस पर गंभीरता से विचार करे
देश में पैक्ड खाने-पीने की चीजों पर बढ़ती निर्भरता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई से कहा है कि पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के सामने वाले हिस्से पर साफ चेतावनी लेबल लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए। अदालत ने कहा कि ज्यादा चीनी, फैट और नमक वाले उत्पादों से लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिलनी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के वी विश्