इससे पहले, राहुल गांधी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ लोकसभा अध्यक्ष के साथ सोमवार को आधे घंटे बैठक की। इसके बाद गतिरोध दूर होने की उम्मीद जगी थी। नेता प्रतिपक्ष ने बजट पर चर्चा से पूर्व व्यापार समझौते पर संक्षिप्त चर्चा और इसकी शुरुआत उनकी ओर से शुरू करने की शर्त रखी। इसके जवाब में सरकार ने शर्त रखा कि सत्र के दौरान आसन, प्रधानमंत्री की अवमानना, सदन में विपक्षी सदस्यों के व्यवहार पर नेता प्रतिपक्ष खेद जताएं। सरकारी सूत्रों ने कहा, यह भी हो सकता है कि नेता प्रतिपक्ष भारत-अमेरिका समझौते पर बोलने के बाद फिर से सदन की कार्यवाही न चलने दें। ऐसे में सरकार किसी शर्त के बंधन में नहीं बंधना चाहती।राहुल ने सोमवार शाम को दावा किया कि अध्यक्ष ने उन्हें बजट सत्र पर चर्चा से पहले बोलने देने का आश्वासन दिया है। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक में यह तय हुआ था कि समझौते पर बोलने के बाद सदन सुचारू रूप से चलेगा। सरकार के सूत्रों का कहना है कि विपक्ष की मंशा स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह नहीं हो सकता कि नेता प्रतिपक्ष के बोलने के बाद सदन की कार्यवाही न चल पाए।संकेत साफ हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की तरह ही आम बजट पर चर्चा के लिए भी सरकार को ध्वनिमत का सहारा लेना होगा। चूंकि इस सत्र के महज चार कार्यदिवस शेष बचे हैं, ऐसे में सरकार के रणनीतिकारों को लगता है कि उनके पास दूसरा चरण शुरू होने से पहले बीच का रास्ता निकालने के लिए लंबा अवसर होगा।राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के जवाब के दौरान आसन की ओर से विपक्षी महिला सांसदों पर की गई टिप्पणी को भी सूत्र ने सही बताया। सूत्र का कहना था कि जिस दिन पीएम को चर्चा का जवाब दे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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