1 of 10 delhi accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स Link Copied दोनों घटनाएं अलग-अलग हादसे नहीं हैं। ये दिल्ली-एनसीआर के बुनियादी ढांचे की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की एक ही कहानी के दो अध्याय हैं। जनकपुरी में जिस जगह कमल की मौत हुई, वहां दिल्ली जल बोर्ड की ओर से गड्ढा खोदा गया था। लेकिन न बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड, न रात में कोई रोशनी। बृहस्पतिवार रात कमल उसी गड्ढे में गिरा और उसकी जान चली गई। सिस्टम ने फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा इंतजाम कागजों तक सीमित हैं। दिल्ली में सरकारें बदलती रहीं, घोषणाएं बदलती रहीं लेकिन सिस्टम जस का तस बना रहा। नोएडा के सेक्टर-150 में निर्माणाधीन बेसमेंट में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत और उसके कुछ दिन बाद जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर एचडीएफसी में कॉल सेंटर में काम करने वाले कमल की जान जाना। यह वीडियो/ हटाएं 2 of 10 जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम - फोटो : अमर उजाला आंकड़े चीख रहे हैं, सिस्टम बहरेपन पर कायम राजधानी दिल्ली में खुले नालों, सड़क धंसने और मानसून के दौरान जलभराव के कारण औसतन हर महीने चार लोगों की मौत हो रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच ऐसे हादसों में 89 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद न तो जमीनी स्तर पर हालात सुधरे और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई स्थायी और सख्त कार्रवाई हो सकी। 3 of 10 जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत - फोटो : अमर उजाला राजस्व विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इन मौतों के बाद न तो अधिकांश मामलों में अधिकारियों की जवाबद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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