1 of 15 Delhi Kamal Death - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, यह सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है। एक ऐसी व्यवस्था का सच, जिसे शायद न जुड़वा भाई के असमय बिछड़ने का दर्द समझ आता है और न ही उस पिता मां की पीड़ा, जिनके कंधों पर जवान बेटे का शव आ गया। जनकपुरी के खुले गड्ढे में पड़ी बाइक और युवक का निर्जीव शरीर यह सवाल पूछ रहा है कि क्या लापरवाही अब हादसा नहीं, बल्कि स्वीकार्य व्यवस्था बन चुकी है? दिल्ली की सड़क पर हुए गड्ढे में रात भर तड़पता रहा कमल, पर सिस्टम सोता रहा। सुबह मिली लाश के बाद हरकत में आई मशीनरी शायद यह नहीं समझ पाई कि एक बिलखती मां की चीखें सिर्फ शोक नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ आरोप हैं जिससे अब पूछा जाना जरूरी है, क्या तुम्हें भी कभी दर्द होता है? यह वीडियो/ हटाएं 2 of 15 जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम - फोटो : अमर उजाला सूचना थी, संसाधन थे, मोबाइल की लोकेशन भी मिल गई थी। फिर भी एक युवक को तड़प-तड़पकर मरने दिया गया। जनकपुरी हादसे में 20 फीट गहरे गड्ढे में फंसे कमल को बचाने से सिस्टम ने हाथ खींच लिए। घटनास्थल से महज 800 मीटर दूर थाना था और 200 मीटर के दायरे की मोबाइल लोकेशन थी। 3 of 15 जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत - फोटो : अमर उजाला इसके बावजूद स्मार्ट कही जाने वाली दिल्ली पुलिस रात भर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी। परिजन दो थानों के बीच अपने लाड़ले को खोजने के लिए भटकते रहे लेकिन पुलिस ने सर्च ऑपरेशन नहीं शुरू किया। नतीजतन एक युवा पूरी रात अंधेरे में तड़पता रहा और सुबह उसकी लाश निकली। 4 of 15 जल बोर्ड के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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