भारत और अमेरिका के बीच 45 लाख करोड़ रुपये की व्यापारिक डील के बाद केंद्र सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताया है। जहां एक ओर विपक्ष इस समझौते को किसानों के लिए नुकसानदेह बता रहा है, वहीं सरकार ने दो टूक कहा है कि न तो कृषि क्षेत्र के हितों से समझौता किया गया है और न ही देश की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच आने दी जाएगी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बाद विदेश मंत्रालय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलग-अलग बयानों में सरकार की स्थिति साफ की है। अमेरिका से डील के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से जब ये पूछा गया कि क्या ट्रंप से डील के लिए भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब विदेश मंत्रालय देगा। अब विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा खरीद को लेकर भारत की रणनीति पर स्थिति साफ की है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलती अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के बीच, मंत्रालय ने कहा है कि “140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है”।एमईए ने अपने बयान में कहा, “बाजार की वस्तुनिष्ठ स्थितियों और विकसित होती अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए हमारे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति के मूल में है”। इसका सीधा अर्थ है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा और जहां भी देशहित में बेहतर विकल्प मिलेगा, वहां से ऊर्जा संसाधन खरीदेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा व्यापार के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विपक्ष के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि भारत-अमेरिका व्या …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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