भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर ( करीब 45,29,069.80 रुपये) के व्यापार समझौते के लिए एक अंतरिम ढांचे पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में पैठ बढ़ाने का एक बड़ा मौका भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना और भविष्य के व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव रखना है। आइए इस जटिल समझौते की बारीकियों को आसान भाषा में सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।भारत को इस समझौते के तहत अपने प्रमुख निर्यात क्षेत्रों- फार्मास्यूटिकल्स (जेनेरिक दवाएं), रत्न और आभूषण, और विमान के पुर्जों- के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिली है। अमेरिका ने अंतरिम समझौता पूरा होने के बाद इन भारतीय उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर टैरिफ (आयात शुल्क) हटाने की प्रतिबद्धता जताई है।बिल्कुल। विमानन क्षेत्र में, अमेरिका उन विमानों और उनके पुर्जों से टैरिफ हटा देगा जिन पर पहले एल्युमीनियम, स्टील और तांबे के आयात से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों के तहत शुल्क लगता था। वहीं, ऑटो सेक्टर के लिए, भारत को ‘प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट कोटा’ का लाभ मिलेगा। इसका सीधा अर्थ है कि भारतीय ऑटो पार्ट निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में अन्य गैर-प्राथमिकता वाले आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में शुल्क में रियायत मिलेगी, जो उन्हें एक प्रतिस्पर्धी बढ़त दिलाएगा।जेनेरिक दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआइ्र) को इस ढांचे में शामिल किया गया है, जो भारतीय दवा निर्माताओं के लिए राहत की बात है। हालांकि, यह धारा 232 (Section 232) के तहत अमेरिकी जां …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
अमेरिका से ₹45 लाख करोड़ की ट्रेड डील: भारत के दवा, विमान के पुर्जों और आभूषण सेक्टर को बड़ी राहत, समझें गणित
भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर ( करीब 45,29,069.80 रुपये) के व्यापार समझौते के लिए एक अंतरिम ढांचे पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में पैठ बढ़ाने का एक बड़ा मौका भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना और भविष्य के व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव रखना है। आइए इस जटिल समझौते की बारीकियों को आसान