अमेरिका और रूस के बीच दुनिया के सबसे खतरनाक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करने वाला ऐतिहासिक परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता टूट गया। इस पर क्रेमलिन ने गुरुवार को खेद जताया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि वह मौजूदा सीमाओं को बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं और एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि चाहते हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह परमाणु हथियारों पर सीमाएं चाहते हैं, लेकिन चीन को भी किसी नई संधि का हिस्सा बनाना चाहते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि 21वीं सदी में चीन को शामिल किए बिना वास्तविक हथियार नियंत्रण संभव नहीं है, क्योंकि उसका परमाणु भंडार तेजी से बढ़ रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका और रूस की तुलना में चीन का परमाणु शस्त्रागार काफी छोटा है और मौजूदा दौर में वह परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल नहीं होगा। चीन ने न्यू स्टार्ट के टूटने पर खेद जताते हुए अमेरिका से रूस के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि रूस चीन के रुख का सम्मान करता है और यह भी दोहराया कि अगर व्यापक संधि पर बातचीत होती है तो नाटो देशों फ्रांस और ब्रिटेन के परमाणु शस्त्रागार को भी शामिल किया जाना चाहिए। हथियार नियंत्रण समर्थकों ने न्यू स्टार्ट के खत्म होने पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक खतरनाक त्रिपक्षीय परमाणु हथियार दौड़ शुरू हो सकती है। इस समझौते के खत्म होने के साथ ही बीती आधी सदी से अधिक समय में पहली बार दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं रह गई है। इससे बिना रोक-टोक परमाणु हथियारों की दौड़ की आशंक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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