नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन को लिखित जवाब में बताया कि तीन फरवरी तक इंडिगो के सबसे ज्यादा 405 विमानों की जांच हुई, जिनमें से 148 में बार-बार खराबी मिली। लेकिन एयर इंडिया ग्रुप का अनुपात इससे कहीं ज्यादा खराब रहा। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच हुई, जिनमें से 191 में बार-बार दिक्कतें मिलीं। यह कुल जांच का करीब 72 प्रतिशत है।अलग-अलग आंकड़ों में एयर इंडिया के 166 में से 137 विमानों में और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 में से 54 विमानों में खराबी पाई गई। अन्य एयरलाइंस में स्पाइसजेट के 43 विमानों की जांच हुई, जिसमें 16 में कमी मिली। वहीं, अकासा एयर के 32 में से 14 विमानों में खराबी पाई गई।इन आंकड़ों पर एयर इंडिया के प्रवक्ता ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन ने बहुत ज्यादा सावधानी बरतते हुए अपने पूरे बेड़े की बड़े पैमाने पर जांच की है, इसलिए ये संख्या ज्यादा दिख रही है। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी ज्यादातर कमियां डी श्रेणी की हैं। इसमें सीट, ट्रे टेबल और स्क्रीन जैसी चीजें आती हैं। अधिकारी ने कहा कि इनका विमान की सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है।मंत्री मोहोल ने बताया कि विमानन नियामक डीजीसीए ने निगरानी बढ़ा दी है। डीजीसीए ने योजना के तहत 3,890 निगरानी निरीक्षण, 56 रेगुलेटरी ऑडिट, 84 विदेशी विमानों की जांच और 492 रैंप निरीक्षण किए। इसके अलावा बिना बताए 874 स्पॉट चेक और 550 नाइट निरीक्षण भी किए गए। मंत्री ने यह भी बताया कि डीजीसीए में तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करने के लिए पुनर्गठन किया गया है। साल 2022 में तकनीकी पद 637 थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 1,063 कर दिया गया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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