पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान करीब 1.6 प्रतिशत ‘अमान्य’ मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची से हटाने के लिए योग्य पाया गया है। ये वे मतदाता हैं, जो अपने मतदान अधिकारों की वैधता को प्रमाणित करने वाले सहायक पहचान दस्तावेजों के साथ सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। यह भी पढ़ें-AIMIM Vs BJP: UGC नियमों को लेकर ओवैसी का मोदी सरकार पर हमला, कहा- सरकार जातिगत भेदभाव दूर करने में रही नाकाम पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के लिए बुलाए गए ‘अमान्य’ मतदाताओं की कुल संख्या 31,68,426 थी। इनमें से 50,000 से कुछ अधिक (कुल अमान्य मतदाताओं का 1.57 प्रतिशत) बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए।इसलिए मतदाताओं की सूची से नाम हटाने के लिए ईआरओ द्वारा उन्हें योग्य घोषित किया गया। सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया, ‘अमान्य’ मतदाताओं के लिए सुनवाई सत्र पूरे हो चुके हैं। वर्तमान में तार्किक विसंगति के मामलों की सुनवाई चल रही है। यह तय हो चुका है कि अमान्य मतदाताओं में से 1.57 प्रतिशत मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। अब यह देखना बाकी है कि अंतिम मतदाता सूची में तार्किक विसंगति के कितने मामलों को हटाया जाता है।" सुनवाई वर्तमान में जारी अनमैप्ड मतदाता वे हैं जो स्व-मैपिंग या वंशज मैपिंग के माध्यम से 2002 की मतदाता सूची के साथ कोई संबंध स्थापित करने में असमर्थ रहे। दूसरी ओर, तार्किक विसंगति के मामले वे हैं जिनमें वंशानुगत मानचित्रण के दौरान असामान्य डेटा का पता चला था। जिन मतदाताओं को तार्किक विसंगति के मामलों के रूप में पहचाना गया है और सुनवाई के लिए तलब किया गया है, उनकी कुल संख्या 94, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Bengal SIR Row: चुनाव आयोग का दावा- नोटिस देने के बाद भी नहीं पेश हुए मतदाता; अब कटेंगे इनके नाम
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान करीब 1.6 प्रतिशत ‘अमान्य’ मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची से हटाने के लिए योग्य पाया गया है। ये वे मतदाता हैं, जो अपने मतदान अधिकारों की वैधता को प्रमाणित करने वाले सहायक पहचान दस्तावेजों के साथ सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। यह भी पढ़ें-AIMIM Vs BJP: UGC नियमों को लेकर ओवैसी का मोदी सरकार पर हमला, कहा- सरकार जातिगत भेदभाव दूर करने में रही नाकाम पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के लिए बुलाए गए ‘अमान्य’ मतदाताओं