16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्यों को केंद्र से बहुत बड़ी रकम मिलने वाली है। इसी वजह से केंद्र सरकार को अपने खर्च, घाटे और कर्ज को कम करने की योजना पर बहुत सोच-समझकर चलना होगा। यह बात व्यय सचिव वी वुअलनाम ने सोमवार को कही। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% तय करने का सुझाव 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनागरिया की अगुआई वाले आयोग ने सुझाव दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच साल तक केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% ही रखी जाए। यानी केंद्र जितना टैक्स वसूलेगा, उसका 41% हिस्सा राज्यों को मिलेगा। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाला अनुदान को दोगुना इसके अलावा आयोग ने कहा है कि ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों (जैसे पंचायतें और नगरपालिकाएं) को मिलने वाला अनुदान दोगुना किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास के काम बेहतर ढंग से हो सकें। 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 2026-27 से 2030-31 की अवधि में कुल 7.91 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है, जिससे जमीनी स्तर पर बुनियादी सेवाओं और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, राज्यों के लिए हस्तांतरण के बाद के राजस्व घाटे के अनुदान को समाप्त करने की सिफारिश की। आयोग के फार्मूले के तहत राज्यों को कैसे मिलेगा लाभ? बजट के बाद वुअलनाम ने कहा कि वित्त आयोग के फार्मूले के तहत केंद्रीय कर संग्रह से राज्यों को लगभग 14 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, अनुदानों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) व केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं (Central Sector Schemes) को मिलाकर कुल मिलाकर 25 लाख करोड़ रुपय …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Budget: राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ने के बीच क्या घट पाएगा केंद्र के कर्ज का भार? बजट को लेकर ये बोले व्यय सचिव
16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्यों को केंद्र से बहुत बड़ी रकम मिलने वाली है। इसी वजह से केंद्र सरकार को अपने खर्च, घाटे और कर्ज को कम करने की योजना पर बहुत सोच-समझकर चलना होगा। यह बात व्यय सचिव वी वुअलनाम ने सोमवार को कही। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% तय करने का सुझाव 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनागरिया की अगुआई वाले आयोग ने सुझाव दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच साल तक केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41% ही रखी जाए। यानी केंद्र जितना टैक्स