केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए बजट का एलान कर दिया है। इसमें भारत के पड़ोसी और अन्य सहयोगी देशों के लिए वित्तीय सहायता की भी घोषणा की गई है। भूटान से लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश से लेकर अफ्रीकी देशों तक की मदद के लिए राशि का एलान किया गया है। हालांकि, इस बजट में एक चौंकाने वाली बात यह रही कि चाबहार बंदरगाह के लिए सहयोग राशि वाली पंक्ति को 2026-27 के लिए खाली छोड़ा दिया गया। ऐसे में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रतिशत के मामले में सबसे बड़ी कटौती बांग्लादेश की सहायता राशि में की गई है, जिसे आधा (50%) कर दिया गया है।इन दोनों देशों के बजट में ₹50-50 करोड़ की कमी की गई है।बीते दिनों में कई हलकों में यह भी चर्चा हुई कि भारत आने वाले समय में अमेरिका के दबाव में चाबहार बंदरगाह योजना से बाहर भी हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले ही धमकी दी थी कि ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच धमकी दी थी कि उससे व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी के अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया जाएगा। भारत पर पहले ही अमेरिका की तरफ से कुल 50 फीसद टैरिफ लगाया जा चुका है। इसमें 25 फीसदी आयात शुल्क व्यापार के मसले पर, जबकि अतिरिक्त 25 फीसदी रूस से तेल खरीद को लेकर लागू है। ऐसे में जब ट्रंप प्रशासन की तरफ से ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ का एलान किया गया तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तक ने कहा कि भारत ने ट्रंप के दबाव में ईरान के चाबहार बंदरगाह पर नियंत्रण छोड़ दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने चाबहार पर जनता के करीब 1100 करोड़ रुपये लगाए थे, जो कि अब बर्बाद हो चुके हैं। तब भारत के विदेश मंत्रालय ने …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
भारत ने बजट में किस देश को क्या दिया?: बांग्लादेश के लिए सहायता कम हुई, चाबहार बंदरगाह पर आवंटन गायब
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए बजट का एलान कर दिया है। इसमें भारत के पड़ोसी और अन्य सहयोगी देशों के लिए वित्तीय सहायता की भी घोषणा की गई है। भूटान से लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश से लेकर अफ्रीकी देशों तक की मदद के लिए राशि का एलान किया गया है। हालांकि, इस बजट में एक चौंकाने वाली बात यह रही कि चाबहार बंदरगाह के लिए सहयोग राशि वाली पंक्ति को 2026-27 के लिए खाली छोड़ा दिया गया। ऐसे में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रतिशत के मामले में