अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हलचल जारी है। एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय से लेकर महाराष्ट्र सरकार में सुनेत्रा पवार के शामिल होने की बात जारी है। दोनों धड़ों के विलय के पीछे की क्या सियासत है? विलय से पहले सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने का दांव क्यों चला गया? इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, समीर चौगांवकर और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। समीर चौगांवकर: दोनों धड़ों के बीच विलय की तैयारी हो गई थी। सुनेत्रा पवार जो शपथ लेने जा रही हैं, उसकी जानकारी शरद पवार को नहीं है। इससे लगता है कि अब इस विलय को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है। ये भी तय था कि सुनेत्रा पवार राज्य की राजनीति में लौटेंगी। वित्त मंत्रालय सुनेत्रा पवार को मिलता है या नहीं ये देखना होगा। संभावना ये है कि सुनेत्रा पवार अजित पवार की सीट से चुनाव लड़ेंगी और उनके बेटे पार्थ राज्यसभा जाएंगे। पार्टी में जो टूट की संभावना नजर आ रही उसे सुनेत्रा पवार कैसे रोक पाएंगी। ये देखना होगा। ये जरूर तय है कि एसीपी महायुति के साथ बनी रहेगी। राकेश शुक्ल: 90 के दशक में कांग्रेस इसी तरह के संटक से गुजर चुकी है। आज एनसीपी भी उसी से गुजर रही है। एनसीपी को बचाना इसलिए जरूरी है क्योंकि महाराष्ट्र का मराठा समुदाय नेतृत्व विहीन हो गया है। इसलिए सुनेत्रा पवार को आगे किया गया। पार्टी का अध्यक्ष कोई भी हो सकता है, लेकिन कमान सुनेत्रा पवार के हाथ में रहेगी। कोशिश ये भी हो रही है कि मराठा वोटर एकनाथ शिंदे की तरफ न शिफ्ट हो जाए। पूर्णिमा त्रिपाठी: मुझे लगता है कि इसमें भाजपा की अपनी राजनीति है और देवेंद्र फडणवीस …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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