पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग की ओर से जारी केंद्रीय पर्यवेक्षकों की सूची पर आपत्ति जताते हुए इसमें बदलाव की मांग की है। राज्य सरकार ने आयोग को पत्र लिखकर 15 में से 9 आईएएस अधिकारियों के नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा है, जिनमें राज्य के गृह सचिव भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव प्रशासनिक और आधिकारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भेजा गया है। सरकार का कहना है कि जिन अधिकारियों के नाम सुझाए गए हैं, वे राज्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर कार्यरत हैं, ऐसे में चुनावी ड्यूटी से उनकी अनुपस्थिति प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। चुनाव आयोग करेगा अंतिम फैसला राज्य सरकार के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और अंतिम फैसला आयोग द्वारा लिया जाएगा। इससे पहले आयोग ने पश्चिम बंगाल से 25 वरिष्ठ अधिकारियों की सूची जारी की थी, जिन्हें पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया जाना है। इस सूची में 15 आईएएस और 10 आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। इनमें हावड़ा और आसनसोल के पुलिस आयुक्तों के नाम भी हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने कई बार राज्य सरकार से नाम मांगे थे। लेकिन समय पर जवाब न मिलने के कारण सूची खुद तैयार कर जारी करनी पड़ी। अनिवार्य ब्रीफिंग सत्रों के निर्देश सूची जारी करने के साथ ही आयोग ने सभी चयनित अधिकारियों के लिए अनिवार्य ब्रीफिंग सत्रों के निर्देश भी दिए हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारु ढंग से संपन्न कराई जा सके। इस घटनाक्रम को चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
West Bengal: चुनाव से पहले ममता सरकार ने EC की सूची पर उठाए सवाल, नौ IAS अफसरों के नाम बदलने का भेजा प्रस्ताव
पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनाव आयोग की ओर से जारी केंद्रीय पर्यवेक्षकों की सूची पर आपत्ति जताते हुए इसमें बदलाव की मांग की है। राज्य सरकार ने आयोग को पत्र लिखकर 15 में से 9 आईएएस अधिकारियों के नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा है, जिनमें राज्य के गृह सचिव भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव प्रशासनिक और आधिकारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भेजा गया है। सरकार का कहना है कि जिन अधिकारियों के नाम सुझाए गए हैं, वे राज्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर कार्यरत हैं, ऐसे में चुनावी ड्यूटी स