पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाली एक ऐसी रणनीतिक पहल है, जिसे दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य मकसद वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। अमेरिका चाहता है कि आधुनिक तकनीक केवल भरोसेमंद लोकतांत्रिक देशों के पास ही रहे और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम हो सके। इस गठबंधन में अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देश पहले से ही शामिल हैं। हाल ही में कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी इसके सदस्य बने हैं।जैकब हेलबर्ग ने जोर देकर कहा कि शुरुआत में इस गठबंधन का केंद्र जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब थे। लेकिन अब सप्लाई चेन को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए भारत का साथ आना जरूरी है। भारत के पास न केवल खनिज संसाधन हैं, बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की विशाल प्रतिभा भी है। अमेरिका का मानना है कि भारत के आने से हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक नया विकल्प तैयार होगा।इस गठबंधन की कार्यप्रणाली बहुत खास होगी। इसमें फंक्शनल वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे, जो हर देश की विशेषज्ञता का फायदा उठाएंगे। जैसे नीदरलैंड लिथोग्राफी में माहिर है, ताइवान फैब्रिकेशन में और भारत सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाएगा। हेलबर्ग ने स्पष्ट किया कि एआई की यह दौड़ 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था को तय करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोधी देश सप्लाई चेन को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए पैक्स सिलिका जैसा आर्थिक सुरक्षा गठबंधन जरूरी है।दिलचस्प बात यह है कि 2025 में जब पैक्स सिलिका की पहली बैठक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
US-India Partnership: अमेरिका को आई भारत की याद, चीन से निपटने के लिए पैक्स सिलिका में स्वागत को तैयार
पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाली एक ऐसी रणनीतिक पहल है, जिसे दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य मकसद वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। अमेरिका चाहता है कि आधुनिक तकनीक केवल भरोसेमंद लोकतांत्रिक देशों के पास ही रहे और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम हो सके। इस गठबंधन में अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देश पहले से ही शामिल हैं। हाल ही में कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी इसके स