भारतीय वायुसेना के बैंड ने सिंदूर संरचना बनाई। यह प्रस्तुति ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित रही। संगीत और संरचना के माध्यम से सैन्य बलों के बलिदान और पराक्रम को श्रद्धांजलि दी गई। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को लंबे समय तक तालियों से सराहा। बीटिंग रिट्रीट समारोह हर वर्ष विजय चौक पर आयोजित होता है और यह गणतंत्र दिवस समारोहों के समापन का प्रतीक है। सैन्य परंपरा से निकले इस आयोजन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बैंड देशभक्ति और शास्त्रीय धुनों की प्रस्तुति देते हैं। यह आयोजन भारतीय सशस्त्र बलों की परंपरा, अनुशासन और वीरता को रेखांकित करता है।समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समारोह में शामिल हुए। तीनों शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन के राष्ट्रीय महत्व को और मजबूत किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीटिंग रिट्रीट समारोह गणतंत्र दिवस समारोहों के औपचारिक समापन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की समृद्ध सैन्य विरासत की ताकत को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे देश की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं और उनका अनुशासन व शौर्य पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा है।समारोह में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बैंडों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुति दी। देशभक्ति और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण ने वातावरण को भावुक और गर्व से भर दिया। यह आयोजन न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और परंपरागत विरासत का भी उत्सव है।बीटिंग रिट्रीट के साथ 77वां गणतंत्र दिवस समारोहों का समापन हुआ। तिरंगे क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें