भारत और दक्षिण एशिया का विमानन क्षेत्र आने वाले दो दशकों में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार बनने वाला है। अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने अनुमान लगाया है कि बढ़ते एयर ट्रैफिक को संभालने के लिए 2044 तक भारत और दक्षिण एशिया को करीब 3,300 नए विमानों की जरूरत होगी। इस रिपोर्ट की पांच बड़ी बातें? हैदराबाद में आयोजित चार दिवसीय ‘विंग्स इंडिया 2026’ समिट के दौरान बोइंग ने अपना ‘कमर्शियल मार्केट आउटलुक’ पेश किया। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (यूरेशिया और भारतीय उपमहाद्वीप) अश्विन नायडू ने बताया कि भारत एक ‘ग्रोथ मार्केट’ है और अगले 20 वर्षों में यहां विमानों का बेड़ा चार गुना बढ़ जाएगा। 1. छोटे विमानों की सबसे ज्यादा मांग कुल 3,300 नए विमानों में से करीब 90% हिस्सेदारी यानी 2,875 विमान ‘सिंगल-आइल’ या नैरो-बॉडी जेट्स की होगी। वहीं, 395 विमान वाइड-बॉडी (बड़े आकार) के होंगे। 2. रोजगार की बहारविमानों की संख्या बढ़ने के साथ ही स्किल्ड स्टाफ की भारी मांग होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 20 वर्षों में क्षेत्र को 45,000 पायलट, 45,000 टेक्नीशियन और 51,000 केबिन क्रू सदस्यों की आवश्यकता होगी। 3. ट्रैफिक में 7% की सालाना बढ़ोतरी बढ़ते मिडिल क्लास और मजबूत होती इकोनॉमी के कारण भारत और दक्षिण एशिया में हवाई यात्रियों की संख्या में सालाना औसतन 7% की वृद्धि देखी जाएगी। 4. 195 अरब डॉलर का सर्विस बाज़ार सिर्फ विमान ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, रिपेयर और ट्रेनिंग जैसी एविएशन सेवाओं में भी 195 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की जरूरत होगी। 5. कार्गो और ई-कॉमर्स भारत में मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स के विस्तार से एयर कार्गो (माल ढुलाई) बाज़ार को बढ़ावा मिलेगा। अग …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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