अधिवक्ता के इन तर्कों से बरी हुए मोईद न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से 13 गवाह परीक्षित कराए गए। लंबी बहस के दौरान मोईद की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने जब अदालत में तर्क रखना शुरू किया तो अभियोजन पक्ष कोई जवाब नहीं दे सका। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटनास्थल बेकरी बताया गया है, जबकि विवेचना के दौरान घटनास्थल बेकरी से काफी दूर है। सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो जिस मोबाइल से बनाया जाना कहा गया, उसकी फॉरेंसिक जांच में पुष्टि नहीं हुई। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में राजू खान के साथ मोहित का नाम लिया है। पुलिस के दवाब में पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने फिर से कराया गया, जिसमें मोईद खान का नाम बताया गया। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए पहले बयान में जिस मोहित का नाम लिया था, वह पीड़िता की बहन का देवर है और पड़ोस में रहता है। बचाव पक्ष से मोहित के निवास का प्रमाण व मतदाता पहचान पत्र अदालत में पेश किया गया। पीड़िता के डीएनए की जांच में भी मोईद के विरुद्ध कोई अपराध नहीं पाया गया। मोईद की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने उन्हें निर्दोष बताते हुए राजनीति के तहत फर्जी फंसाने का तर्क दिया और दोषमुक्त करने की मांग की। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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