आर्थिक सर्वे और केंद्रीय बजट पेश होने से ठीक पहले कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि देश में असमानता लगातार बढ़ रही है और कल्याणकारी योजनाएं पीछे हट रही हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार जो आंकड़े पेश कर रही है, वे आम लोगों की असल जिंदगी को नहीं दिखाते। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोला है। राजीव गौड़ा ने कहा कि 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा। दस महीनों में से चार महीनों में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नकारात्मक रहा। देश में आने से ज्यादा पैसा बाहर गया और भारतीय निवेश विदेशों में बढ़ा। मैन्युफैक्चरिंग में काम करने वाले मजदूरों की हिस्सेदारी 12.1 प्रतिशत से घटकर 11.4 प्रतिशत रह गई। रोजगार का बड़ा हिस्सा असंगठित और गिग इकॉनमी में सिमट गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के रिसर्च डिपार्टमेंट के चेयरमैन राजीव गौड़ा ने कहा कि मोदी सरकार के आंकड़ों पर भरोसा करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के आंकड़ों को सी ग्रेड दिया है। गौड़ा ने कहा कि 0.5 प्रतिशत महंगाई दर आम लोगों की सच्चाई नहीं है। उनका आरोप है कि सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है और वास्तविक विकास इससे काफी कम है।राजीव गौड़ा ने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार ने जीडीपी वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत बताई, जबकि खर्च के आधार पर यह 4.9 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि 2025-26 की पहली छमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि 8.4 प्रतिशत बताई गई, लेकिन आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक में यह केव …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
अर्थव्यवस्था की असल हकीकत छिपाई जा रही?: बजट से पहले कांग्रेस ने सरकार के आंकड़ों पर उठाए सवाल, लगाए ये आरोप
आर्थिक सर्वे और केंद्रीय बजट पेश होने से ठीक पहले कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि देश में असमानता लगातार बढ़ रही है और कल्याणकारी योजनाएं पीछे हट रही हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार जो आंकड़े पेश कर रही है, वे आम लोगों की असल जिंदगी को नहीं दिखाते। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोला है। राजीव गौड़ा ने कहा कि 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा। दस