पिता के निधन के बाद परिवार का रखा पूरा ध्यान सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने पिता की मौत के बाद अपने करियर के साथ ही पूरे परिवार का ध्यान रखा। उन्होंने कानपुर में ही 12वीं तक की पढ़ाई की। वह पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में उन्होंने प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया था। इसके बाद सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए आईटी कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी ज्वाइन की। अलंकार की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी अलंकार अग्निहोत्री की सफलता के पीछे एक लंबी कहानी है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और पत्नी आस्था मिश्रा को देते हैं। उन्होंने बताया था कि एक विवाहित व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी करना जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने एक साल की पगार बचाकर रुपए इकट्ठा किए थे, ताकि अगले 2-3 साल तक परिवार को आर्थिक समस्या का सामना न करना पड़े। अलंकार अग्निहोत्री के बारे में और भी जानें यूपी पीसीएस परीक्षा में कानपुर के अलंकार अग्निहोत्री ने 15वीं रैक हासिल की थी। अलंकार ने पहले ही प्रयास में पास कर ली थी यूपी पीसीएस परीक्षा। अलंकार ने यूपीपीएससी की तैयारी से पहले 10 साल तक आईटी सेक्टर में कन्सल्टेंसी की जॉब भी की। वर्ष 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला था। 12वीं पास करने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने बनारस विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे थे। वर्ष 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई-बहन सक्षम हो गए और बहन की शादी हो गई, तब प्राइवेट नौकरी छोड़कर यूपी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Alankar Agnihotri: नहीं हुआ इस्तीफा मंजूर...भय में छोड़ा आवास, जाएंगे HC: पहले प्रयास में किया था UP PCS पास
पिता के निधन के बाद परिवार का रखा पूरा ध्यान सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने पिता की मौत के बाद अपने करियर के साथ ही पूरे परिवार का ध्यान रखा। उन्होंने कानपुर में ही 12वीं तक की पढ़ाई की। वह पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में उन्होंने प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया था। इसके बाद सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते ह