भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस सप्ताह अहम व्यापार समझौता होने वाला है। इस समझौते पर अमेरिका और चीन समेत दुनिया के कई देशों की नजर है। अमेरिका इस डील पर भड़क गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया, लेकिन यूरोपीय देश नयी दिल्ली के साथ एक व्यापार समझौता करने जा रहे हैं। भारत के लिए यह समझौता कितना अहम है? यह व्यापार समझौता केवल शुल्कों में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए व्यापक आर्थिक निहितार्थ रखता है। यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। एक संतुलित समझौते के माध्यम से, भारत अपनी सेवाओं के निर्यात को बढ़ाने और यूरोपीय देशों से उच्च-तकनीकी निवेश आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वार्ता का मुख्य केंद्र यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उद्यमियों और एमएसएमई (MSMEs) को यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप बाजार पहुंच मिले, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ सके। समझौते के प्रमुख बिंदू क्या होंगे- यह समझौता भारत और 27 देशों के व्यापारिक ब्लॉक के बीच होगा। सरकार इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ और निर्यातकों के लिए ‘सुपर डील’ मान रही है। इसका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में संतुलन और वृद्धि लाना है। भारतीय व्यापार नीति के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि इस महीने के अंत में शीर्ष नेतृत्व की यात्रा के दौरान इसकी घोषणा होती है, तो यह न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए नए द्वार खोलेगा, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच भी प्रदान करेगा। पीयूष ग …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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