न्यायमूर्ति जालान ने अपने आदेश में कहा कि अदालत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने में अत्यंत सतर्क रहती है, लेकिन यह एक विशेष परिस्थिति का मामला है, जहां जमानत बिना ठोस आधार के दी गई। निचली अदालत के आदेश में अभियोजन पक्ष के तर्कों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया और जमानत के फैसले के लिए प्रासंगिक कारकों का प्रारंभिक विश्लेषण भी अनुपस्थित था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपी उबेदुल्लाह की जमानत याचिका पर 23 जनवरी को पुनर्विचार करे।6-7 जनवरी की दरमियानी रात रामलीला मैदान क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के सामने एमसीडी के एन्टी-एन्क्रोचमेंट अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि मस्जिद को ध्वस्त किया जा रहा है, जिसके बाद 150-200 लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। भीड़ ने पुलिस और एमसीडी कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं, जिसमें क्षेत्र के थाना प्रभारी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। निचली अदालत ने 20 जनवरी को उबेदुल्लाह को 25,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अब इसे अपर्याप्त कारणों के आधार पर रद्द कर दिया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Turkman Gate Violence: दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त रुख...आरोपी उबेदुल्लाह की जमानत रद्द, पुनर्विचार के निर्देश
न्यायमूर्ति जालान ने अपने आदेश में कहा कि अदालत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने में अत्यंत सतर्क रहती है, लेकिन यह एक विशेष परिस्थिति का मामला है, जहां जमानत बिना ठोस आधार के दी गई। निचली अदालत के आदेश में अभियोजन पक्ष के तर्कों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया और जमानत के फैसले के लिए प्रासंगिक कारकों का प्रारंभिक विश्लेषण भी अनुपस्थित था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपी उबेदुल्लाह की जमानत याचिका पर 23 जनवरी को पुनर्विचार करे।6-7 जनवरी की दरमियानी रात रामलीला म